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साझा सुरक्षा चिंताओं के बीच जापान, फ़िलीपींस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग

फ़ोरम स्टाफ़

जब जापान ने समान विचारधारा वाले देशों में रक्षा और सुरक्षा को सुदृढ़ करने में मदद के लिए 2023 की शुरुआत में अभूतपूर्व योजना की घोषणा की, तो फ़िलीपींस उसकी सूची में शीर्ष पर था। रॉयटर्स समाचार एजेंसी ने बताया कि तोक्यो के आधिकारिक सुरक्षा सहायता कार्यक्रम से उम्मीद की जा रही है कि वह मनीला को समुद्री सुरक्षा मज़बूत करने के लिए रडार और उपग्रह संचार प्रदान करेगा, जिसमें विवादित दक्षिण चीन सागर में अपने प्राथमिक मार्गों की रक्षा करना भी शामिल है। यह घोषणा जापान द्वारा फ़िलीपींस में विकास सहायता और निजी निवेश के लिए 430 करोड़ ($4.3 बिलियन) अमेरिकी डॉलर का वचन देने के बाद सामने आई।

उसके केवल कुछ ही महीनों बाद, जापान, फ़िलीपींस और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहली बार त्रिपक्षीय अभ्यास में भाग लिया। प्रारंभिक तटरक्षक अभ्यास में 500 से अधिक कर्मियों को आतंकवाद विरोधी, समुद्री डकैती और खोज तथा बचाव कार्यों का अभ्यास करने के लिए फ़िलीपींस के बाटन प्रांत के जल में लाया गया।

जापान, फ़िलीपींस और अमेरिका ने जून 2023 में दक्षिण चीन सागर में अपना पहला त्रिपक्षीय तटरक्षक अभ्यास आयोजित किया।

ये मील के पत्थर मनीला और तोक्यो के बीच गहरी रक्षा भागीदारी को चिह्नित करते हैं, जिसे अमेरिका द्वारा बढ़ावा दिया गया और जो दशकों की आर्थिक साझेदारी तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित है। अमेरिका स्थित विदेश नीति अनुसंधान संस्थान के सीनियर फ़ेलो फ़ेलिक्स चांग (Felix Chang) ने लिखा कि फ़िलीपींस दक्षिण पूर्व एशिया में सुरक्षा संबंधों को मज़बूत करने के जापान के दशकों लंबे अभियान में सबसे आगे रहा है।

सामान्य सुरक्षा चुनौतियाँ दोनों द्वीप-समूह वाले देशों के लिए सहयोग को स्वाभाविक प्रतिक्रिया बनाती हैं, जिन्होंने “बीजिंग के सुरक्षा दबाव में लगातार बढ़ोतरी अनुभव की है,” चांग (Chang) ने लिखा। “फ़िलीपींस के लिए, यह समुद्र में चीन के संत्रास, मिसचीफ़ रीफ़ पर मौक़ापरस्त कब्ज़ा और विवादित स्प्रैटली द्वीप समूह के पास स्कारबोरो शोल की नाकाबंदी के रूप में प्रकट हुआ है,” उन्होंने लिखा। “चीन ने जापान के पास पूर्वी चीन सागर वायु-रक्षा पहचान क्षेत्र घोषित किया और विवादित सेनकाकू द्वीप समूह के आसपास जापानी जहाज़ों को परेशान किया।”

जापान और फ़िलीपींस, अमेरिका के संधि सहयोगी हैं। ये दोनों देश ताइवान के भी पड़ोसी हैं, जहाँ पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना लगातार लोकतांत्रिक रूप से शासित द्वीप पर बलपूर्वक कब्ज़ा करने की धमकियों के बीच सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। इस तरह का संकट न केवल जापान और फ़िलीपींस के लिए ख़तरा होगा, बल्कि दुनिया भर में वाणिज्यिक शिपिंग के लिए ताइवान जलडमरूमध्य के महत्व को देखते हुए, वैश्विक आर्थिक गतिविधि के खरबों डॉलर को भी ख़तरे में डालेगा।

जापानी अख़बार द असाही शिम्बुन की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2023 में, जापान के प्रधान मंत्री फ़ुमियो किशिदा (Fumio Kishida) और फ़िलीपींस के राष्ट्रपति फ़र्डिनेंड मार्कोस जूनियर (Ferdinand Marcos Jr.) ने सहमति व्यक्त की कि उनके रक्षा बल फ़िलीपींस में आपदा राहत कार्यों में सहयोग करेंगे। इस व्यवस्था को समझौते की दिशा में एक क़दम के रूप में देखा गया जो प्रत्येक देश की सेनाओं को दूसरे के क्षेत्र में प्रशिक्षित होने की अनुमति देगा। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के उद्देश्य से पारस्परिक पहुँच समझौते पर बातचीत 2022 में शुरू हुई।

विज़िटिंग फ़ोर्सेज़ एग्रीमेंट के समान ही आगे और अधिक विस्तृत सौदा भी हो सकता है। द एशिया टाइम्स वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलीपीनी विदेश मामलों के सचिव एनरिक मनालो (Enrique Manalo) ने अगस्त 2023 में दक्षिण चीन सागर में तनाव पर काँग्रेस की सुनवाई के दौरान कहा कि मनीला “चीन के निकटस्थ” प्रमुख भागीदार के साथ इस तरह का सौदा कर रहा है। यह राष्ट्रों को संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उपकरणों के आदान-प्रदान को व्यापक बनाने देगा और आकस्मिक घटनाओं के दौरान संयुक्त संचालन को बढ़ावा दे सकता है।

एशिया टाइम्स के अनुसार, फ़िलीपीनी सीनेट के अध्यक्ष जुआन मिगुएल ज़ुबिरी (Juan Miguel Zubiri) ने 2023 की शुरुआत में कहा, “जापान एक सहयोगी है, और हमारे जल क्षेत्र में जारी क्षेत्रीय विवादों के चलते, हम अपने सहयोगियों के साथ मज़बूत सुरक्षा सहयोग से लाभान्वित होंगे।”

समाचार वेबसाइट के अनुसार, जापान के कोमिटो राजनीतिक दल के प्रमुख के साथ अगस्त में हुई बैठक के दौरान, मार्कोस (Marcos) ने “शांति बनाए रखने और दक्षिण चीन सागर में व्यापार तथा शिपिंग के मुक्त संचालन की अनुमति देने” में द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने जापान, फ़िलीपींस और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय सहयोग की प्रतिबद्धता पर भी ज़ोर दिया, जो विश्लेषकों के अनुसार इंडो-पैसिफ़िक और विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर तथा ताइवान जलडमरूमध्य जैसे विवादित जलमार्गों में निवारक विस्तार के केंद्र में है।

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